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02-10-17

21 जनवरी 2018 को दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ बनाये जा रहे मानव श्रृंखला में सभी लोग शामिल हों - मुख्यमंत्री


पटना02 अक्टूबर 2017:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 148वीं जयंती पर सम्राट अशोक कन्वेंशन केन्द्र पटना के नवनिर्मित बापू सभागार का लोकार्पण किया और दहेज एवं बाल विवाह के खिलाफ महाभियान की शुरूआत की। मुख्यमंत्री ने बापू सभागार परिसर में विभिन्न जिलों के स्कूली बच्चों द्वारा निर्मित चित्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम का मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिये जागरूकता सामग्री एवं सी0डी0 का लोकार्पण कियाजो महिला विकास निगम के द्वारा दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ तैयार किया गया था। साथ ही मुख्यमंत्री ने जागरूकता अभियान रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एक मोबाइल एप्प भी लांच किया। अभियान की सफलता के लिये बापू सभागार में पांच हजार से ज्यादा महिलाओं को शपथ दिलायी गयी तथा दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ वीडियो पर्दर्शित कर संदेश दिया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित सभी लोगों को शुभकामना देते हुये कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के प्रति वे कृत संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचारों को जन-जन तक पहुँचायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी के छात्र-छात्राओं के बीच बापू के आदर्शों को पहुँचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि चम्पारण सत्याग्रह का शताब्दी समारोह जोर-शोर से मनाया जा रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से गाँधी जी का संदेश जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू किया गयाये भी बापू के प्रति हमारी श्रद्धांजलि है। लोगों का विशाल जन समर्थन मिला। महिलाओं की आवाज पर हमने ये निर्णय लिया। इसे लेकर हमारा मजाक उड़ाया जाता रहा। चंद लोग शराब को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ जोड़कर देखते हैंजबकि उन्हें इस बात की कल्पना नहीं होती है कि बहुत लोग अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा शराब में गंवा देते थे। उन्होंने शराबबंदी को लेकर कहा कि कई लोग इसे स्वतंत्रता और निजी अधिकार के साथ जोड़ते हैं जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई दफा इसे लेकर स्पष्ट कहा है कि शराब का सेवन एवं व्यवसाय करना मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि शराब के सेवन से परिवार के अंदर वातावरण खराब होता है और बच्चों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। परिवार का वातावरण कुंभलाया रहता था। शाम के समय में मारपीट की घटना घटते रहती थी। शहर और कसबों में ऐसा माहौल हर जगह देखने को मिलता था लेकिन शराबबंदी के बाद से माहौल बदला हैप्रेम और सौहार्द्र का वातावरण बना हैघरेलू हिंसा में कमी आई हैबारात जल्द ही दरवाजा लग रहा हैशराब पीकर जो लोग अनाप-शनाप बकते रहते थेउसमें अब परिवर्तन देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में एक महिला का अनुभव साझा कियाजिसमें महिला बताती है कि मेरे पति शराब पीकर झगड़ा करते थे और देखने में भी अच्छे नहीं लगते थे लेकिन जब से शराब पीना छोड़ दिया हैघर पर सब्जी लेकर आते हैंमुस्कुराते हैं और अब देखने में भी अच्छे लगते हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कानून का उल्लंघन करने की प्रवृति कुछ लोगों में होती हैकुछ धंधेबाजी में लगे हुये हैंकितना भी कानून बनाइये उनकी प्रवृति कानून उल्लंघन की ही रहती हैइन पर सख्त नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के खिलाफ मुहिम में आम जनता का अपार समर्थन मिला है। शराबबंदी के खिलाफ अभियान चलता रहेगा। लोगों को जागरूक किया जाता रहेगा। गड़बड़ी करने वालों पर नजर रखनी होगी। ऐसा न हो कि शराब की जगह दूसरी नशीली वस्तु का सेवन न करने लगें। उन्होंने कहा कि सावधानी हटीदुर्घटना घटी। उन्होंने इस सामाजिक अभियान के जारी रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के खिलाफ 21 जनवरी 2017 को जो मानव श्रृंखला बनी थीउसमें चार करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था जो कि लगभग बिहार की आबादी का एक तिहाई हिस्सा था। लगभग चार करोड़ लोग इस श्रृंखला में शामिल हुयेजो जन भावना का प्रकटीकरण था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दहेज एवं बाल विवाह एक बड़ी सामाजिक कुरीति हैजिसे जड़ से मिटाना जरूरी है। हमलोगों ने नारी सशक्तिकरण के लिये काफी उपाय किये हैंजिसमें पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने पर काम किया गया। हमने 2006 में पंचायती राज संस्थाओं में और 2007 में नगर निकायों में आधी आबादी के बराबर उन्हें पचास प्रतिषत आरक्षण दिया। उसके बाद हमने प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन में भी पचास प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया। लड़कियों में अशिक्षा के सबसे बड़े कारणों में से एक गरीबी है। अभिभावक पोशाक की कमी के कारण लड़कियों को स्कूल नहीं भेजते थेइसके लिये हमने मिडिल स्कूल में पढ़ रही बालिकाओं के लिये बालिका पोशाक योजना शुरू कीइससे मध्य विद्यालयों में लड़कियों की संख्या बढ़ी। इसके बाद हमने 9वीं कक्षा की लड़कियों के लिये बालिका साइकिल योजना की शुरूआत की। पहले पटना में भी लड़कियों को साइकिल चलाते हुये नहीं देखा जाता थागाँव में पहले जो लड़की साइकिल चलाते दिख जाती थी तो ये कहा जाता था कि लड़की हाथ से निकल गयी। आज घर-घर से लड़कियां साइकिल चलाकर स्कूल जाती हैं। अब लोगों की सोच बदल गयीउनमें प्रसन्नता आयी है। जिस समय यह योजना शुरू की गयी थीउस समय 9वीं कक्षा में लड़कियों की संख्या 1 लाख 70 हजार से भी कम थीजो आज 9 लाख 40 हजार तक पहुँच गयी है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी हमने काम किया है। अस्पतालों में प्रसव पहले 4 प्रतिषत होता थाजो हमारे अनेक योजनाओं के चलाने के बाद 50 प्रतिशत तक हो गया है। शिशु मृत्यु दर एवं मातृ मृत्यु दर में कमी आयी है। हमारा सारा प्रयास नारी सशक्तिकरण के लिये है। इसके लिये 7 निश्चय में से एक निश्चय सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिये 35 प्रतिशत आरक्षण का था। इस निश्चय पर हमने अमल कर दिया है और यह जनवरी 2016 से ही लागू कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी के बाद अब बाल विवाह एवं दहेज प्रथा जैसी कुरीति पर बड़े चोट करने की जरूरत है। बाल विवाह जो अभी 39 प्रतिषत हैइसके साथ ही जागरूकता के बावजूद भी बड़ी संख्या में महिलायें दहेज प्रथा की शिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह जिसकी संख्या अभी 6 लाख 80 हजार हैउसे 10 लाख करने का लक्ष्य है। ये स्वयं सहायता समूह दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ व्यापक जन चेतना जगाने का दायित्व निभायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग गरीबी के कारणशिक्षा की कमी के कारणरीति रिवाज के कारण बाल विवाह करते हैंइसका दुष्परिणाम काफी गंभीर होता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ कानून है कि 21 साल से कम उम्र के लड़के और 18 साल के कम उम्र की लड़की की शादी नहीं हो सकती परंतु बाल विवाह होता है। बाल विवाह के पश्चात् लड़कियों को काफी कष्ट झेलना पड़ता है। अगर लड़की कम उम्र में गर्भ धारण करती है तो प्रसव के दौरान बच्चा एवं माँ की मौत की आशंकायें बढ़ जाती है और अगर बच्चे होते हैं तो उन्हें अनेक प्रकार की बीमारी सताती है। आज कल बौनापन के शिकार लोगों की संख्या बढ़ रही है। बौनेपन का एक प्रमुख कारण बाल विवाह है। आंकड़े के विश्लेष्ण से यह पता चलता है कि वैसे देश जहाँ लोगों की लंबाई कम थीउनकी लंबाई बढ़ रही है परंतु हमारे यहाँ लोग बौनेपन के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह का एक और कारण यह भी है कि लोगों को लगता है कि ज्यादा उम्र में लड़की की शादी करने में दहेज ज्यादा देना होगा। देश भर में महिला उत्पीड़न में हमारा स्थान 26वां हैवहीं दहेज उत्पीड़न के मामले में उतर प्रदेश के बाद दूसरा है। बाल विवाह एवं दहेज प्रथा पर नियंत्रण के बाद महिला संबंधी अपराध में कमी आयेगी। 2016 में दहेज मृत्यु के 987 मामले और दहेज प्रताड़ना 4852 मामले सामने आये हैं। अगर बाल विवाह एवं दहेज प्रथा से छुटकारा मिल जाय तो कितना अच्छा होगा। दहेज के खिलाफ पहले से 1961 का कानून है तथा 2006 का बाल विवाह का कानून है। इसके बावजूद ये स्थिति है। हमने संकल्प लिया है कि दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ सशक्त अभियान चलायेंगे और इसकी बुनियाद को आगे ले जायेंगे। बिहार को बाल विवाह एवं दहेज प्रथा से मुक्त बनायेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास गौरवशाली रहा है। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर जहाँ हम बैठे हुये हैंहमारे महान सम्राट अशोक यहीं के थे। मौर्यगुप्त वंश का इतिहास यहीं का रहा है। इसी पाटलिपुत्र की धरती से आज जो भारत भूखण्ड हैउससे बड़े भूखण्ड पर यहाँ से शासन का संचालन होता था। शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया का सबसे पहला विश्वविद्यालय यहीं था। नालंदाबिक्रमशीला विश्वविद्यालय रहे हैं अब तो तेलहाड़ा में भी विश्वविद्यालय का पता चला है। इसी धरती से चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना की हैआर्यभट्ट ने दुनिया को शून्य दिया। ये ज्ञान की भूमि हैराज संचालन की भूमि है। यह गुरू गोविंद सिंह जी महाराज की जन्मस्थली है। बुद्ध की ज्ञान की भूमि है। चम्पारण में गाँधी जी जो कि राजकुमार शुक्ल के द्वारा निलहा किसान समाधान के लिये बुलाये गये थेने यहाँ आकर चम्पारण सत्याग्रह की शुरूआत की। यह आन्दोलन सफल रहासरकार को झुकना पड़ाबिहार अग्रेरियन बिल लाया गयाटैक्स को रोकना पड़ा। चम्पारण सत्याग्रह ने देश की आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी। उसके 30 साल के भीतर ही देश आजाद हुआ। हमारा इतना गौरवशाली इतिहास होने के बावजूद हम सामाजिक कुरीतियों के आज भी शिकार हैं। हमने विकास कियाबिजली के क्षेत्र मेंसड़क के क्षेत्र मेंशिक्षा के क्षेत्र मेंस्वास्थ्य के क्षेत्र मेंये भी सच है लेकिन इसका लाभ तभी होगा जब हम इन कुरीतियों पर विजय प्राप्त कर लेंगे। हमारे लोक संवाद के कार्यक्रम में एक महिला ने आकर कहा कि शराबबंदी की तरह ही दहेज प्रथा के खिलाफ भी अभियान चलाइये उसी समय से इसके खिलाफ अभियान चलाने का मेरे मन में संकल्प आया। बाल विवाहदहेज प्रथा के खिलाफ संकल्प में आप भी शामिल होइये। दहेज वाली शादी में न जाने का सबसे आग्रह करता हूँ। इस तरह के प्रयास से सकारात्मक वातावरण बनेगा। कानून का पालन मुस्तैदी से तो हो हीसाथ में जन भावना को जागृत करने का सशक्त प्रयास जारी रखना है। शराबबंदी से मिला जन समर्थन हमारे प्रयास को बुलंद करेगा। इसमें जीविका की दीदी भागीदार बनेंबाल विवाहदहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करें। साथ ही शराबबंदी एवं नशामुक्ति को एक क्षण भी न भूलें। हमें पूरा विष्वास है कि जनता का पूरा सहयोग मिलेगा। लोगों के भरोसे से समाज बदलेगा। पिछली बार शराबबंदी के पहले भी अभियान चलाया था और शराबबंदी के बाद भी अभियान चलाया गया। जो मानव श्रृंखला 21 जनवरी 2017 को शराबबंदी एवं नशामुक्ति के लिये बनी थीवैसी ही मानव श्रृंखला फिर 21 जनवरी 2018 को दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ बनायी जाय जो जन भावना का प्रकटीकरण होगा। उन्होंने लोगों को इस अभियान को दिल से अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अगर दहेज वाली शादी में लोग नहीं जायेंगे तो ऐसे लोग समाज से अपने आपको बहिष्कृत महसूस करेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार राजनीतिक रूप से काफी जागरूक रहा है परंतु सामाजिक रूप से उतना नहीं। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिये जागरूकता पैदा किया जायेगा। हमारा विकास सर्वांगीण होना चाहिये। भौतिक विकास के साथ-साथ अंदर से भी परिवर्तन हो। सम्मान का भाव सबके प्रति रहे। प्रेमसौहार्द्रमेल-जोल का भाव सिर्फ मनुष्यों के प्रति नहींसभी जीव-जंतुओं के प्रति भी रहे। धार्मिक स्थल पर भी सामंजस्य रहे क्योंकि हर एक आत्मा में परमात्मा का वास है। मनुष्य प्रकृति के साथ छेड़छाड़ न करेयह धरती सबके लिये हैपर्यावरण के प्रति सर्तक रहें। समाज की कुरीति से छुटकारा पाकर मनुष्य देवत्व की तरफ प्रस्थान कर सकता है। बाल विवाह एवं दहेज प्रथा जैसी कुरीति को दूर करने के लिये अपने मन को समझाइये और अपने पड़ोस को भी। सात निश्चय चलेगायह संकल्प है। सभी से प्रार्थना है कि आज के दिन संकल्प लेंएकजुट हों और नई ऊॅचाई पर बिहार को ले जायें। सभी समूहसंगठनजीविका दीदी सबलोग मिलकर इसको गति दें। आप बीती घटना बताने वाली तीनों बच्चियों का मैं अभिनंदन करता हूँ जो एक मिसाल बनी है। इस अभियान को राजनीति से न जोड़ें। 21 जनवरी 2018 को सभी पार्टी के लोग मानव श्रृंखला में शामिल हों।

       आयोजित कार्यक्रम में वैशाली की रिंकी कुमारी जिन्होंने बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठायी थी ने अपना अनुभव बतायागया की काजल कुमारी जिन्होंने भी बाल विवाह का विरोध किया था उन्होंने ने भी अपना अनुभव बताया तथा पटना की धनमंती कुमारी जिन्होंने दहेज प्रथा का विरोध किया था ने भी अपना अनुभव बताया। आयोजित कार्यक्रम को अध्यक्ष बिहार विधानसभा श्री विजय कुमार चैधरीउप मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदीसमाज कल्याण मंत्री श्रीमती कुमारी मंजू वर्मामुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंहयूनिसेफ के प्रतिनिधि डॉo यासमिन अली हक ने भी संबोधित किया।

       इस अवसर पर सभापति बिहार विधान परिषद श्री हारून रसीदभवन निर्माण मंत्री श्री महेश्वर हजारीग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमारनगर विकास एवं आवास मंत्री श्री सुरेश शर्माशिक्षा मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मापंचायती राज मंत्री श्री कपिलदेव कामतसांसदविधायकविधान पार्षदगणमान्य व्यक्तिविकास आयुक्त श्री शिशिर सिन्हापुलिस महानिदेशक श्री पी0के0 ठाकुरविभिन्न विभागों के प्रधान सचिव/सचिवमुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमारमुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीश चन्द्रामुख्यमंत्री के सचिव श्री मनीष कुमार वर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारीजन शिक्षा कार्यकर्ताजीविका की दीदीविकास मित्र सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।