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02-10-17

बिहार संग्रहालय की इतिहास दीर्घाओं व अन्य दीर्घाओं का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण


पटना, 02 अक्टूबर 2017:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहार संग्रहालय की इतिहास दीर्घाओं के साथ ही अन्य दीर्घाओं का आज लोकार्पण किया। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर आयोजकों ने मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों का स्वागत पुष्प-गुच्छ भेंटकर किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गाँधी जयंती के मौके पर बिहार संग्रहालय के शेष हिस्सों का लोकार्पण किया जा रहा हैजिससे उन्हें बेहद खुशी हो रही है। इससे पहले 7 अगस्त 2015 को एक हिस्से का लोकार्पण हुआ था। इसकी खासियत एवं स्ट्रक्चर की प्रशंसा करते हुये उन्होंने कहा कि इसके निर्माण के पहले काफी मुसीबतें झेलनी पड़ी। इसके खिलाफ कई बयान दिये गये लेकिन इससे उनका संकल्प और मजबूत हुआ और आज जाकर पूरी तरह से बिहार संग्रहालय आपके सामने मौजूदा स्वरूप में दिखायी दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना म्यूजियम देश का तीसरा सबसे पुराना म्यूजियम है। पटना म्यूजियम से पहले कोलकाता में पहला और चेन्नई में दूसरा संग्रहालय बनने के बाद पटना में 1917 में इस पर काम शुरू किया गया। 1928 में इसका निर्माण पूरा हुआ। इस संग्रहालय में काफी बड़ी संख्या में प्रदर्श हैं। इसके साथ ही कई उत्कृष्ट चीजें हैंजिसे मैंने व्यक्तिगत तौर पर देखा है। जब मैं कॉलेज का छात्र था तो उस समय बड़ी उत्सुकता थी यह जानने की कि संग्रहालय के अंदर ऐसी कौन-कौन सी चीजें हैं। मन की जिज्ञासा को शांत करने के लिये मैं कई बार छात्र जीवन में यहाँ आया। जब मैं मुख्यमंत्री बना और मेरी सरकार बनी तब दुबारा इस संग्रहालय को देखने गया और ये जानकर कि यहाँ काफी बड़ी संख्या में प्रदर्श हैं और इतनी चीजें हैं जो बाहर कहीं भी बिरले देखने को मिलते हैं। इसमें 50 ऐसी मूर्तियां भी हैंजिनके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है कि यह कब की हैं। जब मेरी सरकार बनी तो मैंने यह देखा कि इसकी चहारदीवारी छोटी थीउसी वक्त 18 मूर्तियों की चोरी का मामला भी सामने आया। सी0बी0आई0 को केस हवाले किया गया लेकिन उससे पहले ही बिहार पुलिस ने 17 मूर्तियां बरामद करने में सफलता हासिल कर ली। पटना म्यूजियम की चहारदीवारी को ऊॅचा किया गया और जो भी कमियाँ थीउसे दूर करने का प्रयास किया गया। इस संग्रहालय में राहुल सांकृत्यायन द्वारा लायी गयी दुर्लभ पाण्डुलिपि भी रखी गयी हैजिसे लेकर आलोचकों ने कहा कि इन पाण्डुलिपियों के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने फिर विचार किया कि इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्श होने के चलते पटना म्यूजियम छोटा पड़ रहा है और उसी वक्त बिहार संग्रहालय बनाने का ख्याल उनके मन में आया। उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय तरीके से तैयार किये गये इसकी डिजाइन की प्रशंसा की और कहा कि पहले उनके मन में इस बिहार संग्रहालय को विश्व स्तर का बनाने को लेकर कई आशंकायें थी मसलन आइडिया कौन देगाइसके डिजाइन के बारे में कौन बतायेगा और इसकी खासियत को लेकर किन बिन्दुओं पर विचार किया जायेगा। इसके बाद कनाडा के तकनीकी विशेषज्ञों ने इसका अध्ययन किया और कई देशों के विशेषज्ञों की निगरानी में इसका काम शुरू हो पाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बिहार-झारखण्ड का विभाजन हुआ तो उस वक्त वे सांसद हुआ करते थे। लोगों के मन में आशंकाएं थीं कि झारखण्ड के अलग होने के बाद बिहार के पास कुछ नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि उस वक्त लोगों के मन में यह भी विचार था कि झारखण्ड के अलग राज्य बनने के बाद खान एवं खदान सभी पड़ोसी राज्य में चले गये। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान की स्थली बिहार के पास अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास जैसी पूंजी थीजिस पर आगे चलकर आज के बिहार की नींव तैयार की गयी। उन्होंने दुहराया कि पाटलिपुत्रपावापुरीनालंदाराजगीरगयाबिक्रमशिलावैशाली और कई ऐतिहासिक धरोहर जो बिहार के पास हैवो कहीं नहीं है। उन्होंने कहा कि अब तेलहाड़ा विश्वविद्यालय की खोज हुयी है जो हमारे लिये बड़ी संपति है। बिहार संग्रहालय बनाने के पूर्व कई अफवाहें फैलायी गयीकई बयान दिये गये और हाईकोर्ट में भी मामले को लाया गया लेकिन वे काम करते रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 1764 के पहले की चीजें पटना म्यूजियम में रखी जायेंगी और उसके बाद की तमाम चीजें बिहार संग्रहालय में लायी जायेगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था की जा रही है कि एक ही टिकट पर पटना म्यूजियम और बिहार संग्रहालय देखा जा सकेगा। बिहार संग्रहालय को लेकर विदेशी मीडिया में खबरें छपती थींबाद में दिल्ली के कुछ अंग्रेजी दैनिकों ने इसे जगह दी। उन्होंने कहा कि यहाँ महिला एवं बच्चों की रूचि के हिसाब से चीजें तैयार की गयी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना के तहत स्कूली छात्रों को ऐतिहासिक एवं दर्शनीय स्थल घुमाने की व्यवस्था की गयी है और इस संबंध में परिभ्रमण योजना तैयार की गयी हैजो आमतौर पर निजी स्कूल पहले देखने को मिलता था। उन्होंने कहा कि संग्रहालय देखने आने वाले लोगों को अपने इतिहास को जानने का मौका मिलेगाउनका ज्ञान बढ़ेगाउन्हें अपने इतिहास पर नाज होगा और वे संकल्प लेंगे कि उन्हें उसी पुराने गौरव को प्राप्त करना हैजो हमारी पहचान रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदर्श के लिये केव बनना बाकी है। एक-एक चीज पर उनकी नजर है। पूरा देश बापू की जयंती मना रहा है और चम्पारण शताब्दी वर्ष भी मनाया जा रहा है। इस मौके पर इस संग्रहालय को जनता को समर्पित करने में उन्हें दोहरी खुशी मिल रही है। उन्होंने कहा कि 21 जनवरी 2017 को नशामुक्ति के विरूद्ध ऐतिहासिक मानव श्रृंखला बनायी गयी थी और एक बार फिर 21 जनवरी 2018 को दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के विरूद्ध मानव श्रृंखला बनायी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार संग्रहालय के उद्घाटन के पूर्व वे लगातार मुख्य सचिव से पूछते थे कि इसकी शुरूआत कब होगी। इससे पहले बिहार दिवस के दिन शुरू करने की योजना थी लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से इसकी शुरूआत नहीं हो सकी। आज 2 अक्टूबर के दिन इसके औपचारिक शुरूआत को लेकर एक महीने पहले विचार बन गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोधी प्रमुखता से इन बातों को उठाते रहे कि इस संग्रहालय के निर्माण में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा हैकरोड़ों-अरबों खर्च किये जा रहे हैंजबकि जनहित से जुड़ी योजनाओं पर हमारा ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोधियों के बयानों को पीछे छोड़ते हुये वे लगातार काम करते रहे। न्याय के साथ विकास के पथ पर लगातार चल रहे हैं। इस साल के अंत तक हर बसावट में बिजली पहुंचा देंगे और अगले साल के अंत तक हर घर में बिजली कनेक्षन दे देंगे। सड़कों की हालत सुधर गयी है। इसके साथ ही सात निश्चय पर तेजी से अमल हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो बिहार का बजट पहले 26 हजार करोड़ से 28 हजार करोड़ के बीच हुआ करता थावो अब बढ़कर 1 लाख 60 हजार करोड़ हो गया है। उन्होंने विरोधियों से पूछा कि बिहार की कलासंस्कृति को जगाने के लिये आत्म सम्मान बढ़ाने के लिये क्या वे बिहार संग्रहालय का निर्माण भी नहीं करा सकते। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि पटना म्यूजियम की भी तमाम कमियों को दुरूस्त कर देंगे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर भवन निर्माण विभाग और कलासंस्कृति विभाग के अधिकारियों की प्रशंसा की। उन्होंने खासतौर पर कहा कि कलासंस्कृति जैसे विषयों पर अधिकारियों की रूचि के चलते बिहार संग्रहालय का काम पूरा हो सकाइसके लिये सभी प्रशंसा के पात्र हैं।

समारोह के पश्चात् मुख्यमंत्री ने लगभग डेढ़ घंटे तक बिहार संग्रहालय की सभी दीर्घाओं का अवलोकन किया और विशेषज्ञों से हर एक प्रदर्श के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

                इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री सुशिल कुमार मोदीन्यायमूर्ति के0के0 मण्डलभवन निर्माण मंत्री श्री महेश्वर हजारीकलासंस्कृति मंत्री श्री कृष्ण कुमार ऋषिग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमारशिक्षा मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्माविधान पार्षद श्री रामवचन रायविधायक श्री श्याम रजकमुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंहप्रधान सचिव कला संस्कृति श्री चैतन्य प्रसादमुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सह प्रधान सचिव भवन निर्माण श्री चंचल कुमारमुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीश चन्द्रामुख्यमंत्री के सचिव श्री मनीष कुमार वर्मामुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंहजिलाधिकारी पटना श्री संजय कुमार अग्रवालवरीय पुलिस अधीक्षक श्री मनु महाराज सहित कई अन्य वरीय अधिकारीदेश के कई राज्यों के लब्ध प्रतिष्ठित कलाकार एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।