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03-12-17

जो पढ़ेगा वही आगे बढ़ेगा - मुख्यमंत्री


पटना, 03 दिसम्बर 2017:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज मेधा दिवस समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्री आर0के0 महाजन ने मुख्यमंत्री को अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मेधा दिवस समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देशरत्न डॉ0 राजेन्द्र बाबु की जयंती है इसे इस वर्ष से मेधा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गयी है। इसका निर्णय तो पूर्व में किया गया था लेकिन क्रियान्वयन नहीं हो पाया था। अब इसकी शुरुआत की गयी है  इसे मैं प्रासंगिक और उपयुक्त मानता हूँ। डॉ राजेन्द्र प्रसाद कितने मेधावी छात्र थे कि सौ साल पहले जब वे छात्र हुआ करते थे तो उनके परीक्षक ने उनके बारे में टिप्पणी की थी कि एक्जामिनी इज बेटर दैन एक्जामिनर। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग भी बचपन में जब पढ़ते थे तो उनकी प्रतिभा के बारे में काफी कुछ बताया जाता था। वास्तव में वे मेधा के प्रतीक थे |

 मुख्यमंत्री ने  कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में राजेन्द्र बाबु का योगदान काफी महत्वपूर्ण था। उन्हें इसी के चलते देशरत्न की उपाधि दी गयी थी। संविधान निर्माण के लिए बनाई गई संविधान सभा के वे अध्यक्ष थे। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागु किया गया। उस समय अंतरिम तौर पर वे राष्ट्रपति बने थे। वर्ष 1952 एवं 1957 में पुनः राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद वे दिल्ली में नहीं रहे जबकि पूर्व राष्ट्रपति के रूप में उनके रहने का इंतजाम वहां हो सकता था और वापस पटना आकर उसी आश्रम में रहने लगे जिसमे वे पहले रहा करते थे। वैसा अद्भुत व्यक्तित्व तो आज के युग में कल्पना भी नहीं किया जा सकता है। उनका जीवन कितना सादगी पूर्व था। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष हमलोग मना रहे हैं। बापू जब पटना आये थे तो राजेंद्र बाबु यहाँ नहीं थे वे कलकत्ता से पुरी चले गए थे। बाद में गाँधी जी चम्पारण गए। गाँधी जी किसानों की व्यथा बड़ा ध्यान से सुनते थे और उसको उस समय के नामी वकील लोग दर्ज करते थे। राजेन्द्र बाबू भी उस समय से आजादी की लड़ाई तक बापू के साथ हमेशा रहे और देश की आजादी के बाद देश के  प्रथम राष्ट्रपति बने। इसलिए मेधा दिवस उनकी जयंती पर मनाना बिल्कुल उपयुक्त है। मैं केंद्र से आग्रह करूँगा कि इसे पुरे देश में मनाया जाए। हमलोग अपने राज्य में इसके माध्यम से मेधा को बढ़ाना चाहते हैं और उसे गति देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद साहब की जन्मतिथि 11 नवम्बर को बिहार में शिक्षा दिवस के रूप में हमलोग मनाते हैं और 5 सितम्बर को डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में पूरा देश मनाता है। अब 3 दिसम्बर को राजेन्द्र बाबु के जन्मदिवस के अवसर पर इसे बिहार में हमलोग मेधा दिवस के रूप में मनाना प्रारम्भ किया है। मेरा मानना है कि पूरे मुल्क में इसे मनाना चाहिए और मेधा को बढ़ाने तथा मेधावी को पुरस्कृत करने का उपाय हो । मुख्यमंत्री ने कहा कि मेधावियों को पुरस्कृत करने का काम तो पहले से ही किया जा रहा है। हमने इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री राहत कोष से करवाया थालेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने कहा कि हमलोगों की वित्तीय स्थिति ठीक है और वर्ष 2010 से ही समिति के द्वारा मेधावी छात्रों को पुरस्कार दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मैं बच्चों को पुरस्कार दे रहा था उसी समय एक छात्र ने एक कागज का टुकड़ा बढ़ाया और  मैंने उसको पढ़ने के बाद आज से ही यह फैसला लागु कर दिया कि राजेन्द्र बाबु के नाम पर देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद मेधा छात्रवृति’  शुरू की जायेगी। आज जो छात्र पुरस्कृत हुए हैं उनकों इसी वित्तीय वर्ष से इसका लाभ मिलने लगेगा । आपकी मेधा ऐसे ही बढ़ती रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में नौकरी के लिए परीक्षा हो या उत्कृष्ट संस्थान में नामांकन के लिए परीक्षा हो  हमारे बिहार से सबसे अधिक संख्या में छात्र सफल होते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उतना काम नहीं हुआ है फिर भी बिहार में उत्कृष्ट मेधा है। मेधा और विकसित हो आगे इसका ख्याल रखना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के  क्षेत्र में बुनियादी तौर पर अनेक काम किये गए। आउट ऑफ स्कूल रहने वाले बच्चों को स्कूल तक पहुँचाने के लिए प्रयास किया गया। 12.5 प्रतिशत बच्चे जो स्कूलों से बाहर रहते थे उनको लाने के लिए ध्यान केन्द्रित किया गया। उसके बाद मिडिल स्कूल में लड़कियों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए बालिका पोशाक योंजना शुरू की गयी। आज स्कूलों में लड़कियों की उपस्थिति लड़को से ज्यादा है। 9वीं कक्षा में लड़कियों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए साइकिल योजना शुरू की गयी। पहले लड़कियों की उपस्थिति 9वीं क्लास में 1 लाख 70 हजार थी जों अब बढ़कर 9 लाख से ज्यादा हो गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले पटना शहर में भी साइकिल चलाते हुए लड़कियाँ नहीं देखी जाती थीं। अब जब समूह मेंएक ड्रेस पहनकर साइकिल पर लड़कियों का झुण्ड निकलता है तो उसका दृश्य अद्भुत होता है। गाँव के लोगों की मानसिकता में अब बदलाव आया है और बाहर से भी इसपर रिसर्च करने के लिए लोग आ रहे हैं। लड़कों की मांग पर हमने लड़कों के लिए भी साइकिल योजना चलाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ करना हैं, खासकर शिक्षा के स्वरूप के बारे में सोचने की जरूरत है। हर छात्र के अंदर एक अलग खासियत होती है उसको उभारने की कोशिश करनी चाहिए। शिक्षा की गुणवत्ता के बारे में दुनिया में देश भर में  चर्चा चलती रहती है। इसकी बेहतरी के लिए प्रयास करते जाना और आगे बढ़ते जाना है। इससे शिक्षा के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगाजो पढ़ेगा वही आगे बढेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 प्रतिशत से ज्यादा बजट हमलोंग शिक्षा पर खर्च करते हैं लेकिन वह भी अपर्याप्त हैअभी बहुत कुछ करना बाकी है ।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार शिक्षा कीज्ञान की भूमि रही है। भगवान बुद्ध को ज्ञान यही प्राप्त हुआ था। भगवान महावीर का जन्म यहींज्ञान की प्राप्ति यहीं और निर्वाण भी यही प्राप्त हुआ था। चाणक्य जब पाटलिपुत्र आये तब ही अर्थशास्त्र की रचना की। आर्यभट्ट ने शून्य का अविष्कार किया। महाकवि विद्यापति के बारे में सब कोई तो जानते ही हैं। अभी हाल ही में जब मैं मधुबनी गया तो मुझे अयाची मिश्र के बारे में जानकारी मिली, वो राजदरबार से कोई भी मदद नहीं लेते थे और युवाओं को मुफ्त में पढ़ाते थे। उनकी एक शर्त यही थी कि जो बच्चें पढ़ लेते थे  उनको दस लोगों को पढ़ाना पड़ता था। शिक्षा के क्षेत्र में यह मानसिकता हमारी 600 वर्ष पहले थी। मैं उनके गाँव जाकर अभिभूत हुआ। बिहार के हर इलाके की पृष्ठभूमि अद्भुत  है। मैं सभी मेधावी छात्रों को बधाई देता हूँ। वो द्रुतगति से आगे बढ़ेअपना नाम रौशन करेंसमाज का नाम रौशन करेंराज्य का नाम रौशन करें और देश का नाम रौशन करें।

 मुख्यमंत्री ने मेधा दिवस के अवसर पर वार्षिक माध्यमिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 2017 के स्वच्छ एवं कदाचार रहित परीक्षा के संचालन में सर्वश्रष्ठ योगदान देनेवाले राज्य के 10 जिला क्रम से औंरंगाबादकटिहारकैमूरगोपालगंजजमुईनालंदापटनापश्चिम चंपारणबेगुसराय, एवं मधेपुरा के जिलाधिकारियों को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री ने वार्षिक माध्यमिक परीक्षा 2017 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम से दस रैंक तक के छात्रों को भी पुरस्कृत किया। प्रथम स्थान प्राप्त करनेवाले परीक्षार्थी को 1 लाख रुपयादूसरे स्थान प्राप्त करने वाले को 75 हजार रुपया और तीसरे स्थान प्राप्त करनेवाले को 50 हजार रूपये के चेक के साथ-साथ एक लैप टॉप एवं किनडल इ रीडर प्रदान किया। चतुर्थ स्थान से दसवे स्थान तक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 10 हजार रुपया एवं लैप टॉप प्रदान किया। इंटरमीडिएट के कला संकायविज्ञान संकायवाणिज्य संकाय में  उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले  प्रथम 5 विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। प्रथम स्थान प्राप्त करनेवाले परीक्षार्थी को 1 लाख रुपयादूसरे स्थान प्राप्त करनेवाले को 75 हजार रुपया और तीसरे स्थान प्राप्त करनेवाले को 50 हजार रूपये के चेक के साथ-साथ एक लैपटॉप एवं किनडल इ रीडर प्रदान किया। चौथे एवं पांचवें स्थान प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियों को 15 हजार रुपये  एवं लैपटॉप प्रदान किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा,  मुख्य सचिव श्री अंजनी कुमार सिंहशिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्री आर० के० महाजन,पटना के प्रमंडलीय आयुक्त सह अध्यक्ष बिहार विद्यालय परीक्षा समिति श्री आनंद किशोर ने भी सभा को सम्बोधित किया। इस अवसर पर प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर एच0 के0 दीवानशिक्षा विभाग के सचिव श्री रॉबर्ट चैन्ग्थ्यूशिक्षा विभाग के अपर सचिव श्री मनोज कुमारप्राथमिक शिक्षा के निदेशक श्री रामचंद्रडू जीमाध्यमिक शिक्षा के निदेशक श्री राजीव प्रसाद सिंह रंजनमुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंहशिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे ।