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09-04-18

हम सब प्रकृति की ऊपज हैं प्राकृतिक बनना होगा प्रकृति के साथ


मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज गांधी मैदान के पास श्रीकृष्ण साइंस सेंटर परिसर में साइंस ऑन ए स्फियरऑडिटोरियम का फीता काटकर तथा ग्लोब पर विज्ञान प्रदर्शन आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर उदघाट्न किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले ऑडिटोरियम में ग्लोब के माध्यम से प्रकृति तथा प्रकृति पर जल, जन-जीवन की स्थितियों से जुड़े तथ्यों का बारिकी से अवलोकन किया। इसके पूर्व स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री को गुलाब देकर स्वागत किया।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद द्वारा पटना के विज्ञान केंद्र में बने साइंस ऑन ए स्फियरऑडिटोरियम के उदघाट्न समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे याद है, तब मैं साइंस के फस्र्ट ईयर का छात्र था। उस समय मुझे प्रकृति के बारे में जानकारी प्राप्त हुई और आज थोड़ी देर इसको देखने का मौका मिला। इस ग्लोब के जरिए प्रकृति के बारे में जानने-समझने का मौका मिला। ग्लोब के जरिए जिस तरह से पूरे आकाश गंगा के बारे में, सौरमंडल के बारे में इतने बेहतर तरीके से सौरमंडल के अन्य ग्रहों के बारे में, सूर्य के बारे में जो कुछ भी एक संक्षिप्त डेमोंस्ट्रेशन इन्होंने किया, वह सब काफी ज्ञानवर्द्धक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम पर्यावरण के लिए चिंतित हैं। मुझे बड़ी खुशी हुई कि गांधी जी के चंपारण के सत्याग्रह शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। गांधी जी ने सत्याग्रह के साथ-साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा की बात की, उसके प्रति लोगों को जागृत किया। उन्होंने कहा था कि कि धरती हमारी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है लेकिन आपकी लालच को पूरा नहीं कर सकती है। हमारी लालच पर्यावरण को नष्ट कर रहा है इसलिए बहुत जरुरी है कि पर्यावरण के बारे में युवा पीढ़ी का अवेयर किया जाए। पर्यावरण को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के बारे में छात्र-छात्राओं को इस ग्लोब के माध्यम से देखने-समझने का मौका मिलेगा कि किस प्रकार कार्बन डाईआक्साइड अमेरिका से लेकर यहां तक के पर्यावरण को बर्बाद करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 में मुझे काम करने का मौका मिला। झारखंड अलग होने के बाद यहां हरित क्षेत्र 9 प्रतिशत से कम था। जब हम युवा थे तो पढ़ा करते थे जेनरल नॉलेज में कि बिहार में वर्षापात 1500 मी0मी0 हुआ करता था। पिछले 12 वर्षों से काम संभाल रहा हूँ। बिहार में वर्षापात 800 मी0मी0 पहुंच गया है। किस प्रकार मौसम बदला है। उन्होंने कहा कि बिहार एक ऐसा प्रांत है, जो बाढ़ और सूखा दोनों का दंश झेलता है। सबसे बड़ी बात ये है कि बिहार में बाढ़ बाहर की नदियों से आती है। अब गंगा को ही देख लीजिए, ये उत्तराखंड से निकलती है, सोन नदी मध्यप्रदेश से, कोशी और गंडक नेपाल से निकलती है। बरसात में इन नदियों में पानी के बहाव के साथ स्लिट डिपॉजिट की वजह से समस्या हमारे यहां उत्पन्न हो जाती है। अभी दो साल पहले गंगा नदी में आयी बाढ़ के चलते गंगा किनारे अवस्थित 12 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए थे। मेरे हिसाब से अगर पानी का दबाव और बढ़ता तो पटना में पानी आ जाता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में आबादी का घनत्व अधिक है। 17 प्रतिशत से ज्यादा हम ग्रीन कवर नहीं कर सकते हैं। हमलोगों ने तय किया कि सबसे पहले हम 15 प्रतिशत हरित आवरण के लक्ष्य को प्राप्त करें। इसको लेकर सर्वेक्षण जारी है और उम्मीद करता हूँ कि 17 प्रतिशत हो जाएगा। हरित आवरण बढ़ने से वर्षापात बढ़ेगा, रेन फॉल न घटे इसके लिए पर्यावरण के प्रति बच्चों के बीच जागृति पैदा करने की जरुरत है। उन्होनें कहा कि पृथ्वी निरंतर सर्यू  की परिक्रमा करती रहती है परंतु हमें यह पता भी नहीं चलता है कि पृथ्वी घूम रही है। यह सब कुदरत का खेल है। सब कुदरत का कमाल है कि मनुष्य और अन्य जीव जन्तु के पैर के अंदर कुदरत ने ताकत दी है, जो वो आराम से खड़े होकर चलते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता है कि पृथ्वी चक्कर काट रही है। इन चीजों के बारे में चिंता करना सबके लिए स्वाभाविक है। उन्होनें कहा कि प्रकृति को गहराई से समझना होगा। आज की युवा पीढ़ी पानी के उपयोग एवं संरक्षण के लिये जागरूक हुई है। पानी की बेवजह बर्बादी से परहेज कर रही है। पुराने लोग भले ही गलती कर लें लेकिन आज की पीढ़ी इन चीजों को बाखूबी समझ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर आप आज पर्यावरण की रक्षा नहीं करेगें तो आने वाली पीढ़ीयों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अगर हम सहेज नहीं पाएंगे तो आने वाली पीढ़ी को तो बहुत कुछ देखने को नहीं मिलेगा। हम तो हमेशा कहते हैं कि आज गंगा नदी की क्या हालत है ? हमारा जन्म यहाँ से 50 किलोमीटर दूर बख्तियारपुर में हुआ था। हमलोग गंगा नदीं मे नहाते थे और वहां से पानी भरकर लाते भी थे। उस वक्त गंगा का पानी कितना स्वच्छ और निर्मल था। आज आप देख लीजिए गंगा की क्या हालत हो गई है। आज गंगा नदी का पानी पीने लायक नहीं बचा है। आज जो पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ हो रहा है, अगर लोगों को जागरुक नहीं किया गया तो भविष्य में इसका परिणाम भुगतना होगा। पर्यावरण की शुद्धता की जागृति हमें पैदा करनी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति के लिये लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होनें कहा कि भूकंप से किसी की मौत नहीं होती बल्कि भूकम्प में ढहने वाले मकानों के मलबे में दबकर लोगों की मौत हो जाया करती है इसलिए हमलोग अन्य देशों की तरह अपने यहां भी भूकंपरोधी भवनों के निर्माण करवा रहे हैं। जापान में सबसे अधिक भूकंप आती है, उसने किस तरह से अपने को उसके अनुरूप ढाल लिया है। उसी प्रकार हमलोग भी अब अवेयर हो गए हैं। पहले से जो बना है उसकी बात तो अलग है लेकिन अब नए तकनीक का उपयोग हो रहा है।

 आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने साइसं ऑन ए स्फियरविवरणिका का विमोचन किया। आयोजित कार्यक्रम को पटना विश्वविद्यालय के कुलपति श्री रासबिहारी सिंह, महानिदेशक राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद श्री ए0डी0 चौधरी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति श्री आर0के0 सिन्हा, बी0आई0टी0एम0 कोलकाता के निदेशक जनाब ई0 इस्लाम, बी0आई0टी0एम0 कोलकाता के क्यूरेटर श्री एस0 दास, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, शिक्षाविद् एवं स्कूली बच्चे उपस्थित थे।